अपाॅरचयूनिटी
अक्सर नलाकाययाब लोगों को लगता है कि काश हमें यह करने का अवसर मिला होता, यह करने का अवसर मिला होता , तो आज हम भी कुछ ओर होते। क्या वाकई ऐसा हैं कि जिंदगी ने उन्हें कुछ कने का अवसर ही नहीं दिया? दरअसल हुआ यूं कि जब अवसर उनके सामने था, तो वह उसे पहचान नहीं पाए ओर आज नाकामयाबी पर अवसर न मिलने की बात करते हैं। लोग अक्सर अवसर को नहचान नहीं पाते, क्योंकि यह कड़ी मेहनत का वेश धारण करके आता हैं। अवसर जब दरवाजा खटखटाता हैं तो बहुत से लोग इस ‘शोर’ समझ लेते हैं और अवसर से चूक जाते हैं।
एक बार एक किसान था। एक दिन उसके पास एक संत आया और उसने कहा कि अगर तुम्हारे पा एक बड़ा सा हीरा होता, तो तुम बहुत अमीर होते। अगले दिन किसान अपनी सारी जमीन-जायदात बेचकर हीरे की तलाश में निकल पड़ा। उसने पूरा देश छान मारा, लेकिन उसे हीरा कहीं नहीं मिला और एक दिन निराश होकर उसने खुदकुशी कर ली। उधर, जिस शख्स ने किसान का खत खरीदा था, वह वहां हल चला रहा था। अचानक उसे कुछ चमकता हुआ दिखाई दिया। असल में वह एक बहुत बड़ा हीरा था। खोदने पर पता चला कि किसान के खेत में हीरे की खान थी। असल में हम लोगों में से ज्यादातर उस किसान की तरह होते हैं। अवसर रह वक्त हमारे आस-पास ही होता है और हम उसे कहीं दूर तलाशने चल देते हैं। जब हमारा नजरिया सही होता है और हम मेहनत करते हैं, तो उस शक्त की तरह हीरे की खदान हमारे पास होती हैं, जिसकी वजह से हमें दूसरी तरफ की घास ज्यादा हरी नजर आती हैं। हम दूसरी तरफ की घास क लिए लालायित रहते हैं और दूसरा हमारी तरफ की घास के लिए। इसलिए आप जहां हैं, वहीं अपने आप-पास मौजूद अवसरों को पहचानें।
शालिनी अग्रवाल
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