रविवार, 15 सितंबर 2013

विपरित स्वभाव

विपरित स्वभाव

एक बार तेलानीराम कहीं जा रहे थे।राजस्त में उन्हें एक भिखारी मिला। उसने तेनालीराम को रोककर बोला, ‘‘तेनालीराम जी मैं आपसे एक सलाह लेना चाहता हॅूं।’’

सोमवार, 9 सितंबर 2013

अपाॅरचयूनिटी

अपाॅरचयूनिटी


अक्सर नलाकाययाब लोगों को लगता है कि काश हमें यह करने का अवसर मिला होता, यह करने का अवसर मिला होता , तो आज हम भी कुछ ओर होते। क्या वाकई ऐसा हैं कि जिंदगी ने उन्हें कुछ कने का अवसर ही नहीं दिया?  दरअसल हुआ यूं कि जब अवसर उनके सामने था, तो वह उसे पहचान नहीं पाए ओर आज नाकामयाबी पर अवसर न मिलने की बात करते हैं।  लोग अक्सर अवसर को नहचान नहीं पाते, क्योंकि यह कड़ी मेहनत का वेश धारण करके आता हैं।  अवसर जब दरवाजा खटखटाता हैं तो बहुत से लोग इस ‘शोर’ समझ लेते हैं और अवसर से चूक जाते हैं।
एक बार एक किसान था। एक दिन उसके पास एक संत आया और उसने कहा कि अगर तुम्हारे पा एक बड़ा सा हीरा होता, तो तुम बहुत अमीर होते। अगले दिन किसान अपनी सारी जमीन-जायदात बेचकर हीरे की तलाश में निकल पड़ा। उसने पूरा देश छान मारा, लेकिन उसे हीरा कहीं नहीं मिला और एक दिन निराश होकर उसने खुदकुशी कर ली।  उधर, जिस शख्स ने किसान का खत खरीदा था, वह वहां हल चला रहा था। अचानक उसे कुछ चमकता हुआ दिखाई दिया। असल में वह एक बहुत बड़ा हीरा था।  खोदने पर पता चला कि किसान के खेत में हीरे की खान थी।  असल में हम लोगों में से ज्यादातर उस किसान की तरह होते हैं।  अवसर रह वक्त हमारे आस-पास ही होता है और हम उसे कहीं दूर तलाशने चल देते हैं।  जब हमारा नजरिया सही होता है और हम मेहनत करते हैं, तो उस शक्त की तरह हीरे की खदान हमारे पास होती हैं, जिसकी वजह से हमें दूसरी तरफ की घास ज्यादा हरी नजर आती हैं।  हम दूसरी तरफ की घास क लिए लालायित रहते हैं और दूसरा हमारी तरफ की घास के लिए। इसलिए आप जहां हैं, वहीं अपने आप-पास मौजूद अवसरों को पहचानें।
शालिनी अग्रवाल

शुक्रवार, 6 सितंबर 2013

डायनामाइट से नोबेल

डायनामाइट से नोबेल

करीब एक सदी पहले एक आदमी अखबार पढ़ रहा था। शोक समाचार के काॅलम पर नजर पड़ते ही वह चैक उठा, क्योंकि शोक समाचार में उसी की मृत्यु की सूचना थी। वह घबरा गया कि आखिर ऐसा कैसे हो गया? गलती समाचार पत्र की थी, जिसने दूसरे व्यक्ति की जगह इसका नाम प्रकाशित कर दिया था।  कुछ पल बाद जब ये आदमी सामान्य हुआ तो 

शुक्रवार, 31 अगस्त 2012

गति में ही है जीवन


गति में ही है जीवन

एक बार समुद्र की लहरों ने आगे बढ़ने से इंकार कर दिया। आपसी लगाव के चलते वे प्रवाह को अपनी परेशनी समझाने लगी। समुद्र ने काफी समझाने का प्रयास किया कि मिलन का आनन्द जड़ता में नहीं, गति के साथ जुड़ा हैं, इसलिए गतिशील बनो।

सोमवार, 27 अगस्त 2012

पहला सबक


पहला सबक


एक बार किसी फकीर से किसी सज्जन ने पूछा कि उनका गुरू कौन है?  फकीर ने बताया कि उनका गुरू एक चैर है। अपनी जिंदगी का पहला सबक उन्होने उस चैर से ही सीखा।  इस बात पर वह सज्जन हैरान हुए और पूरी कहानी जाननी चाही।

गुरुवार, 23 अगस्त 2012

पश्चाताप


पश्चापत

रागिनी रायपुर के तहसील आॅफिस में क्लर्क के पदपर कार्यरत है। घर से रोज लोकल बस द्वारा उसका आॅफिस जाना होता है।  एक दिन जब बस से रागिनी आॅफिस जा रही थी, तो बीच में किसी स्टाॅप पर दो युवक चढ़े। उनमंे से एक ने रंगीन चश्मा पहन रखा था। रागिनी के साथी की, एक खाली सीट खाली थी अतः थोड हटकर रागिनी ने उन्हें बैठने को कहा।  उनमें से चश्माधारी युवक वहीं बैठ गया तथा दूसरा कहीं और जगह देखकर बैठ गया।

सोमवार, 20 अगस्त 2012

मेहनत की कमाई


असली कमाई

मनीष अपने माता-पिता का अकेला बेटा था ।  बुरी संगत क कारण वह कोई कामकाज नहीे करता था ।   एक दिन उसके पिता ने उसकी आदातों से परेशान हो कर साफ-साफ कह दिया कि जब तक तुम कुछ कमा कर नहीं लाओगे, तब तक तुम्हारा खाना-पीना बन्द।  यह कह कर पिता अपने काम पर चले गये।  अब  मनीषा बहुत ही परेशान के कमा कर कहां से लाये?  उसकी पेरशानी को उसकी मां देख नहीं सकी और मां दिल पसीज गया तो वो बोली ‘‘यह लो पांच रूपये और शाम को पापा को बोल देना कमा कर लाया हूॅं ।’’


       शाम को जब पापा ने पुछा के क्या कमा कर लाये?  तो मनीष ने पांच रूपये देते हूए कहा ‘‘ये पांच रूपये कमा कर लाया हूं।’’   पिता ने कहा तो जाओं इसे कुएं में फेक दो।  मनीष ने तुरन्त ऐसा ही किया।  अब रोज यही क्रम हो गया।  एक दिन मां बोली ‘‘आज मेरे पास पैसे नहीं है आज तुम्हें कमा कर ही लाने होंगे।’’  उस दिन मनीष ने एक इमारत के निर्माण में ईंटे ढोने का काम किया और शाम को पांच रूपये कमा कर घर लाया। पिता ने हमेशा की तरह ही कहा जा इन्हे कुऐ में फेक दो ।   तो मनीष बोला, ‘‘सारा दिन कडी महनेत कर के पांच रूपये कमाये हैं। और आप कहते हो के कुऐ में फेक दूं।  तब पिता के मुस्कुराते हुए कहा आज वास्तव में  तुमने मेहनत की है और कमाई की है।  अब तक जत जो पैसे तुमने कुएं में डाले थे, वे मेरी कमाई के थे। अब मनीष को मेहनी की कमाई का महत्व समझ गया।
      
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