गति में ही है जीवन
एक बार समुद्र की लहरों ने आगे बढ़ने से इंकार कर दिया। आपसी लगाव के चलते वे प्रवाह को अपनी परेशनी समझाने लगी। समुद्र ने काफी समझाने का प्रयास किया कि मिलन का आनन्द जड़ता में नहीं, गति के साथ जुड़ा हैं, इसलिए गतिशील बनो।
पर वे भविष्य की अनिश्चितता की कल्पना से भयभीत थी। तभी कुछ आगे की गतिशील लहरों ने मुडकर देखा और समझाया, ‘उद्गम से बिछुड़कर ही हम अनंत की ओर जा रही हैं, हम उससे बिछुड़ी कहां हैं।’’ इन बातों को सुनकर सूर्य की किरणो ने भी समर्थन प्रकट किया और कहा कि हम अपने प्रियतम की विशालता में विचरण करते हुए अब अधिक उल्लास प्राप्त हुआ हैं। फूलों की सुगंध ने भी सीर हिलाते हुए कहा कि पुष्प् की गरिमा को विस्तृत करने में हम बिछुड़न का नहीं, पुलकन का अनुभव करती हैं। समुद्र जल से मेघ के वाहन पर बैठने कहा। भाप बनकर जल ने उस पर आसन जमाया ओर हवा के इशारे पर सुदूर यात्रा पर चल पड़े। एक जगह आकर जल धरती पर बरसने लगा। लोगों ने जल का धन्यवाद दिया। तब लहरों की आँखें खुल गई और वह भी आगे बढ़ चली, अनंत की यात्रा पर।
सफलता के लिए लगातार आगे बढ़ते रहना जरूरी है।
एक बार समुद्र की लहरों ने आगे बढ़ने से इंकार कर दिया। आपसी लगाव के चलते वे प्रवाह को अपनी परेशनी समझाने लगी। समुद्र ने काफी समझाने का प्रयास किया कि मिलन का आनन्द जड़ता में नहीं, गति के साथ जुड़ा हैं, इसलिए गतिशील बनो।
पर वे भविष्य की अनिश्चितता की कल्पना से भयभीत थी। तभी कुछ आगे की गतिशील लहरों ने मुडकर देखा और समझाया, ‘उद्गम से बिछुड़कर ही हम अनंत की ओर जा रही हैं, हम उससे बिछुड़ी कहां हैं।’’ इन बातों को सुनकर सूर्य की किरणो ने भी समर्थन प्रकट किया और कहा कि हम अपने प्रियतम की विशालता में विचरण करते हुए अब अधिक उल्लास प्राप्त हुआ हैं। फूलों की सुगंध ने भी सीर हिलाते हुए कहा कि पुष्प् की गरिमा को विस्तृत करने में हम बिछुड़न का नहीं, पुलकन का अनुभव करती हैं। समुद्र जल से मेघ के वाहन पर बैठने कहा। भाप बनकर जल ने उस पर आसन जमाया ओर हवा के इशारे पर सुदूर यात्रा पर चल पड़े। एक जगह आकर जल धरती पर बरसने लगा। लोगों ने जल का धन्यवाद दिया। तब लहरों की आँखें खुल गई और वह भी आगे बढ़ चली, अनंत की यात्रा पर।
सफलता के लिए लगातार आगे बढ़ते रहना जरूरी है।
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