बात १९१७ की है ! साबरमती आश्रम अभी अभी शुरू हुआ था ! गाँधीजी अहमदाबाद के बार्रुम चले जाते ! वहाँ वकीलों और अन्य लोगों से मिलते, आश्रम की चर्चाएँ किया करते ! धीरे- धीरे कुछ वकीलो में गाँधीजी और उनके आश्रम के बार में जानने की जिज्ञासा बढती गयी !
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बात १९१७ की है ! साबरमती आश्रम अभी अभी शुरू हुआ था ! गाँधीजी अहमदाबाद के बार्रुम चले जाते ! वहाँ वकीलों और अन्य लोगों से मिलते, आश्रम की चर्चाएँ किया करते ! धीरे- धीरे कुछ वकीलो में गाँधीजी और उनके आश्रम के बार में जानने की जिज्ञासा बढती गयी !
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उनमे से एक वकील ने बोला, "हम आपके आश्रम का कुछ न कुछ काम करने के विचार से आये हैं !"
गाँधीजी ने कहा, "ठीक है ! यह अनाज साफ़ कीजिए"!
एक वकील चौंक कर बोला, "हम यहाँ क्या ज्वार-बाजरा साफ़ करेंगे?"
गांधीजी बोले,"जी हाँ ! इस समय तो यही काम चल रहा है !"
मन मारकर वकील अनान साफ करने लगे और फिर दुबारा आश्रम में कोई काम मांगने नहीं आए !

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