एक बार एक व्यक्ति रेल में यात्रा कर रहा था ! वह बहुत दुखी लग रहा था , उसके बेटे का दूसरे शहर में बस दुर्घटना में निधन हो गया था ! वह उसके शव को संस्कार के लियें लेने जा रहा था की किसी ने उसकी जेब साफ़ कर दी थी ! उसके पास रेल से उतरकर वहाँ तक जाने के भी पैसे नहीं थे अब ! रेल में बैठे व्यक्ति उसे दिलासा दे रहे थे ! उसी रेल में एक सेठ भी यात्रा कर रहा था, उसने अपना पर्स खोला जिसमे हजारों रूपये थे ! उसने अपनी अमीरी दिखाते हुए उस व्यक्ति को बुलाया और पचास रुपये दे दिए और सब लोगो को ऐसे देखने लगा जैसे उसने हजारों रुपये दे दिए , और सब लोगो को ऐसे देखने लगा जैसे उसने बहुत बड़ा काम किया हो ! उसी समय एक निर्धन सा दिखने वाला व्यक्ति उस व्यक्ति के पास आया और संवेदना प्रकट करते हुए बोला, "भाई मेरे पास मात्र तीस रुपये है और मुझे रेल से उतर कर अपने गांव जाने के लियें दस रूपये बस के किराये के लियें चाहिए होंगे ! मैं तुम्हारी अधिक सहायता नहीं कर पाउँगा, मुझे इसका दुख है ! फिर भी आप ये रुपये रखलो, मैं अपने गाँव पैदल चला जाऊँगा! यह कह कर उसने आग्रह पूर्वक उसकी जेब में सारे पैसे डाल दिए ! वहाँ बैठे लोग सोच रहे थे कि उन दोनो में से अधिक अमीर कौन था, सेठ या वो निर्धन व्यक्ति !
किसी जरुरत मंद कि सहायता के लियें यदि कष्ट भी उठाना पडे तो हिचकना नहीं चाहिए !