असली कमाई
मनीष अपने माता-पिता का अकेला बेटा था । बुरी संगत क कारण वह कोई कामकाज नहीे करता था । एक दिन उसके पिता ने उसकी आदातों से परेशान हो कर साफ-साफ कह दिया कि जब तक तुम कुछ कमा कर नहीं लाओगे, तब तक तुम्हारा खाना-पीना बन्द। यह कह कर पिता अपने काम पर चले गये। अब मनीषा बहुत ही परेशान के कमा कर कहां से लाये? उसकी पेरशानी को उसकी मां देख नहीं सकी और मां दिल पसीज गया तो वो बोली ‘‘यह लो पांच रूपये और शाम को पापा को बोल देना कमा कर लाया हूॅं ।’’
शाम को जब पापा ने पुछा के क्या कमा कर लाये? तो मनीष ने पांच रूपये देते हूए कहा ‘‘ये पांच रूपये कमा कर लाया हूं।’’ पिता ने कहा तो जाओं इसे कुएं में फेक दो। मनीष ने तुरन्त ऐसा ही किया। अब रोज यही क्रम हो गया। एक दिन मां बोली ‘‘आज मेरे पास पैसे नहीं है आज तुम्हें कमा कर ही लाने होंगे।’’ उस दिन मनीष ने एक इमारत के निर्माण में ईंटे ढोने का काम किया और शाम को पांच रूपये कमा कर घर लाया। पिता ने हमेशा की तरह ही कहा जा इन्हे कुऐ में फेक दो । तो मनीष बोला, ‘‘सारा दिन कडी महनेत कर के पांच रूपये कमाये हैं। और आप कहते हो के कुऐ में फेक दूं। तब पिता के मुस्कुराते हुए कहा आज वास्तव में तुमने मेहनत की है और कमाई की है। अब तक जत जो पैसे तुमने कुएं में डाले थे, वे मेरी कमाई के थे। अब मनीष को मेहनी की कमाई का महत्व समझ गया।
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